वेस्ट बंगाल का “कांथा” (Kantha of West Bengal in Hindi)

Kantha of West Bengal
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वेस्ट बंगाल का “कांथा”

कांथा (Kantha) कढ़ाई एक लोकप्रिय शैली है जो पश्चिम बंगाल से आया है। ये एक महत्वपूर्ण प्रतीक है जो बंगाल में ग्रामीण महिलाओं के कौशल और प्रतिभा को प्रदर्शित करता है।

कांथा, जिसका मूल अर्थ है ‘गला’, जो भगवान शिव के साथ जुड़ा हुआ है। कहानी ये है कि शिव जी ने समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर दुनिया को बचाया था और इसलिए इस शब्द का महत्व वैदिक काल से ही है।

इस प्रकार का सिलाई मूल रूप से ‘रनिंग स्टीच’ सिलाई होता है, और काफी सरल भी होता है। पहले ये एम्ब्रॉयडरी क्विल्ट, धोती और साड़ी पर ही होता था, लेकिन समय के साथ ये विकसित होता गया और भारतीय फैशन के दिल में अपनी जगह बना ली।

उत्पत्ति और इतिहास (Origin and History)

कत्था शायद भारतीय कढ़ाई का सबसे पुराना रूप है। इस सुईवर्क के पीछे का उद्देश्य पुराने कपड़ों और सामग्रियों का पुन: उपयोग करना और उन्हें कुछ नया बनाना था। 

ये वही है जो वेस्ट बंगाल के कांथा कढ़ाई को सबसे अलग और आकर्षक बनाता है। कांथा का उत्पादन हुगली, सतग़ाव, पटना, जेसोर, फरीदपुर और पूर्व और पश्चिम बंगाल के अन्य भागों में होता है। 

पत्येक जगह का कांथा अपने आप मे अनूठा होता है, क्योंकि इसको बनाने वालो की अपनी रचना, विचार, नए फॉर्म और डिज़ाइन होते है। कांथा का काम बहुत पुराने समय लगभग 500 साल से चल रहा है।

कांथा के प्रकार (Types of Kantha)

कांथा के सात प्रकार होते है-

  • Lep Kantha
  • Sujani Kantha
  • Baiton Kantha
  • Oaar Kantha
  • Durjani Kantha
  • Archilata Kantha
  • Rumal Kantha

लेप कांथा (Lep Kantha)

सर्दियों के मौसम में गर्माहट पाने के लिए लेप कांथा अपेक्षाकृत मोटी साड़ी को अधिक संख्या में एक के ऊपर एक रख के पूरे टुकड़े को लहरदार डिज़ाइनो में सिला जाता है, जिसपर साधारण कड़ाई को निष्पादित (Execute) किया जाता है।

सुजनी कंथा (Sujani Kantha) 

सुजनी कांथा एक आयताकार (rectangular) कपड़े का टुकड़ा होता है, जिसे लोग कम्बल (blankets) या औपचारिक अवसर के दौरान इस्तेमाल करते है।

बैटन कांथा (Baiton Kantha) 

बैटन कांथा एक चौकोर आकार का आवरण होता है, जिसका उपयोग पुस्तक या मूल्यवान वस्तुओं को कवर करने के लिए किया जाता है।

ओर कांथा (Oaar Kantha)

ओर कांथा आयताकार आकार का साधारण सा पिलो कवर होता है, जिसके किनारो को आकर्षक रूपांकनों और सजावटी चीज़ों से डेकोरेट (सजाया) किया जाता है।

दुर्जनी कंथा (Durjani Kantha)

दुर्जनी कांथा को थालिया के नाम से भी जाता है। कपड़े का एक छोटा आयताकार टुकड़ा जिसमें आमतौर पर बॉर्डर और कमल की आकृति होती है। कपड़े के तीन कोनों को एक साथ अंदर की तरफ खिंचा जाता है और एक साथ एक आवरण की तरह सील जाता है। जिससे वो एक वॉलेट की तरह लगता है।

अर्चिलाता कंथा (Archilata Kantha)

आर्चीलाता कांथा का उपयोग मिरर कवर और टॉयलेट एक्सेसरीज कवर के लिए किया जाता है, ये एक आयताकार आकार का कपड़े का टुकड़ा होता है। जिसपे कमल, पेड़, ज़िग-ज़ैग लाइन, आदि जैसे मोटिफ किए जाते है।

रुमाल कांथा (Rumal Kantha)

रुमाल कांथा का उपयोग शोषक वाइप्स या प्लेट कवरिंग के रूप में किया जाता है। इसके बीच मे कमल होता है और चारो ओर अन्य रूपांकनों की कढाई होती है।

रूपांकनों (Motifs)

  • Tara Chutki (Star and Pinch)
  • Laathi (Stick)
  • Aina Khopa (Mirror & Hair Bun)

कांथा की प्रक्रिया (Process of Kantha)

  • कांथा कढ़ाई के विशेषज्ञ कारीगर पश्चिम बंगाल और ओडिशा की ग्रामीण महिलाएं हैं, क्योंकि कला मुख्य रूप से ग्रामीण बंगाली गृहिणियों द्वारा प्रचलित एक घरेलू शिल्प के रूप में है।
  • कांथा उत्पादों का उत्पादन समय एक दिन से एक वर्ष के बीच अलग-अलग हो सकता है, जो टुकड़े के आकार पर निर्भर करता है।
  • पुराने समय में, कांथा कढ़ाई की प्रक्रिया में पहनी जाने वाली परिधानों की एक स्टिक होती थी, जिसमें आमतौर पर नरम साड़ी और धोती होती हैं, जिन्हें एक साथ सिलना होता है।
  • बेस फैब्रिक पर ट्रांसफर होने से पहले ट्रेसिंग पेपर पर स्केच की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
  • महिलाएं कांथा कढ़ाई पर काम करते समय अपनी उंगलियों के चारों ओर धागा लपेटती हैं।
  • लेकिन समकालीन कांथा कढ़ाई, कारीगर जरूरी नहीं कि पहने हुए कपड़ों के ढेर का उपयोग करते हैं, अक्सर, रंगीन कढ़ाई को बढ़ाने के लिए एक सफेद आधार कपड़े का उपयोग किया जाता है।

कपड़े का इस्तेमाल (Fabric used)

प्रारंभ में कांथा का उपयोग कपास या रेशम पर किया जाता था। लेकिन अब इसका उपयोग अन्य कपड़े जैसे जॉर्जेट, क्रेप और शिफॉन पे भी किया जाता है।

रंग का इस्तेमाल (Colour used)

ज्यादातर बेस सफेद और beige कलर का ही होता है। लेकिन अब लाल नीला, पीला, और हरा और कई कलर के बेस का इस्तेमाल किया जाता है

धागे का रंग (Thread Color)

कंट्रास्टिंग रंग, मलटि कलर, लेकिन डिजाइन को रेखांकित करने के लिए ज्यादातर काले रंग का इस्तेमाल किया जाता है।

कांथा उत्पाद (Kantha Products)

kantha of west bengal

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