कश्मीर की कशीदाकारी (Kashidakari in hindi) 

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कश्मीर की कशीदाकारी (Kashidakari)

कशिदा, जिसे कसीदा के नाम से भी जाना जाता है, कशीदा कढ़ाई का सबसे पुराना रूप है जो जम्मू और कश्मीर में उत्पन्न हुआ है। ये एक पारंपरिक प्रकार की आंतरिक कला है जिसे सबसे प्राचीन में से एक माना जाता है।

कशीदा कढ़ाई के अलग-अलग पैटर्न बनाने के लिए मोटे रंग के धागे और साथ ही मोतियों का उपयोग किया जाता है ताकि वो और भी खूबसूरत और आकर्षक लगे।

कश्मीर कढ़ाई के प्रकार (Types of Kashmir Embroideries)

कशीदाकारी के 4 प्रकार होते है-

  • अरि (Ari)
  • सोज़नी (Sozni)
  • टिल्ला या डोरी (Tilla & Dori)
  • रेज़कार (Rezkar)

अरि (Ari)

अरि कशीदाकारी कारपेट, तकिये के कवर, और चादर (bedsheet) पर होता है। अरि कशीदाकारी में उपयोग किए जाने वाले रूपांकनों में आम तौर पर फूल, पैस्ले, पेड़, लैंडस्केप्स और जियोमेट्रिक मोटिफ होते है।

सोज़नी (Sozni)

सोज़नी बहुत महीन और नाजुक सुई द्वारा कि जाने वाली कढाई है, जो मुख्य रूप से पश्मीना और उच्च गुणवत्ता वाले रफ़ल से बने शॉल पर किया जाता है। इस तरह की कढ़ाई में आकृति दोनो ओर दिखाई देती है। 

टिल्ला या डोरी (Tilla & Dori)

टिल्ला कड़ाई में गोल्ड और सिल्वर धागे का उपयोग किया जाता है, टिल्ला कढाई का उपयोग फेरन, साड़ी और शॉल पर किया जाता है। 

सजावटी धागा केवल सतह की कढ़ाई पर रहता है और पीले या सफेद रंग के अतिरिक्त पतले सूती धागे को इसके ऊपर से सिला जाता हैं। इस कढाई में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले मोटिफ्स है कमल, बादाम, चिनार का पत्ता, चिनार का फूल और अंगूर का पत्ता।

रेज़कार (Rezkar)

रेज़कार कढाई शॉल, टेबल कवर और हाउसहोल्ड लिनन पे किया जाता है, इनमे इस्तेमाल होने वाला कपड़ा सूती या रफ़ल कपड़ा होता है। 

उत्पत्ति और इतिहास (Origin and History)

कश्मीर की भूमि फैशन की दुनिया में कशीदा कढ़ाई के सुंदर रूप से जानी जाती है। ये मुग़ल काल में बादशाहों और उस युग के राजघरानों द्वारा संरक्षित था।

ये पाया जा सकता है कि ये कढ़ाई भी रचनात्मक रूप से श्रीनगर के निवासियों द्वारा शुरू की गई थी। आंतरिक सुईवर्क और गुणवत्ता को रंगों और पैटर्नों के व्यापक प्रसार का उपयोग करके बेहतरीन डिज़ाइन बनाए जाते है।

कपड़े का इस्तेमाल (Fabric Used)

इस कढ़ाई का उपयोग रेशम (Silk), कपास (Cotton) और ऊन (Wool) जैसे गर्म कपड़ों पर किया जाता है।

धागे का इस्तेमाल (Thread Used)

इस कढाई को करने के लिए रेशम का धागा, सूती धागा और ऊन का धागा इस्तेमाल किया जाता है।

Stitches

कशीदा एम्ब्रॉयडरी में कई स्टीटचेस का उपयोग किया जाता है जैसे- साटन स्टिच, हेरिंगबोन, स्टेम स्टिच, चेन स्टिच, नॉट स्टिच और कई और भी हैं जो रचनात्मक रूप से लागू किए गए हैं।

Colours used

White (सफेद), green (ज़िंगरी), purple (uder), blue (फिरोजी), Yellow (ज़र्द) और black (मुश्कि)।

रूपांकनों (Motifs)

  • पुष्प रूपांकनों जैसे- लिली, कमल, आईरिस, केसर ओवर और ट्यूलिप को ज्यादातर शॉल पर देखा जाता था। 
  • अन्य डिज़ाइन जैसे – अंगूर, चेरी, बादाम और सेब उनके पसंदीदा थे। चिनार का पत्ता एक महत्वपूर्ण रूपांकन के रूप में माना जाता है।
  • कुछ और भी है जैसे – bale, बूटी, बॉर्डर और पैस्ले।

कशीदाकारी के उत्पाद (Kashidakari Products)

ये कढ़ाई गद्दे के कवर, बेड कवर, पर्दे, कालीन, बैग, पोशाक सामग्री और रेशम की साड़ियों के अलावा, जैकेट, स्टोल और शॉल आदि पे की जाती है।

Kashidakari of Kashmir in hindi

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